Monthly Archives: नवम्बर 2011

Hello world!

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Posted in Uncategorized | 1 टिप्पणी

हमारी कॉलोनी के काका

उम्र के इस मोड़ पर भी….किसी को नमस्ते कहती हूँ…और वे आशिर्वादस्वरूप मेरी हथेली पर कभी कोई टॉफी..लेमनचूस…खट्टी-मीठी गोलियाँ तो कभी दो बेर रख देते हैं. मेरे ये कहने पर…”क्या काका….हम बच्चे थोड़े ही हैं…” वे मुस्कुरा कर कहते हैं….”अरे खा … Continue reading

Posted in काका, मराठी साहित्य'श्रीनिवास रा. तलवलकर', संस्मरण, kaka | 36s टिप्पणियाँ

ज़री बौर्डर पर काले धब्बे

जब सिवकासी में पटाखे बनाने वाले बाल-मजदूरों पर एक पोस्ट लिखी थी….उसके बाद ही ‘ज़री उद्योग’ में लगे  बच्चों के विषय में भी लिखने की इच्छा थी…खासकर इसलिए भी कि कई लोगों का बाल-श्रम के सन्दर्भ में कहना है कि … Continue reading

Posted in ज़री यूनिट, बाल श्रम, बाल-मजदूरों, सिवकासी | 50s टिप्पणियाँ

परकटे नन्हे परिंदे

रचना जी ने अपनी पोस्ट में ‘बाल मजदूरी’ के मुद्दे पर चर्चा की है…पहले भी मैने इस विषय पर लिखा है…और आज भी  मन में कुछ सवाल सर उठा रहे हैं…आखिर, बच्चे अपने खेलने-कूदने ..पढ़ने-लिखने के दिनों में ये सोलह … Continue reading

Posted in 'बाल मजदूरी', 'मिड डे मील' | 28s टिप्पणियाँ

फिल्म ‘मोड़’ : जैसे फिज़ा में एक प्यारी सी धुन

जैसा कि इस ब्लॉग का नाम है….यहाँ बस बातें ही होती हैं…और जब मैं फिल्मो की बातें करती हूँ तो फिर बातों-बातों में लोगो को फिल्म की  कहानी भी पता चल जाती है…और कुछ लोग ऐसा नायाब मौका हाथ से … Continue reading

Posted in आएशा टाकिया, नागेश कुकनूर, फिल्म 'मोड़' : रणविजय सिंह | 32s टिप्पणियाँ