Category Archives: कहानी

आखिर कब तक ??

{सबसे पहले तो क्षमाप्राथी हूँ ,पाठकों…बहुत दिनों बाद कोई कहानी लिखी है…जबकि महीनो पहले खुद से और आप सबसे, एक लम्बी कहानी  लिखने का वायदा भी किया था…कहानी रोज ही दस्तक देती है…पर दूसरे ब्लॉग ने कुछ इतना व्यस्त कर … Continue reading

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खट्टी-मीठी यादों का इक साल

पूरा एक साल गुजर गया, अपनी,उनकी,सबकी बातें करते…और बातें हैं कि ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं….बाढ़  में किसी हहराती नदी सी उमड़ी चली आती हैं. और उन बातों को एक बाँध में बाँधना  जरूरी था सो इस … Continue reading

Posted in कहानी, की-बोर्ड, ब्लॉग, ब्लॉग्गिंग | 43s टिप्पणियाँ

कहानी ‘छोटी भाभी’ की

इन  दिनों व्यस्तता कुछ ऐसी चल रही है कि कहानी के इतने प्लॉट्स दिमाग में होते हुए भी…उन्हें विस्तार देने का मौका नहीं  मिल पा रहा…और ख्याल आया…कहानी सुनवाई तो जा ही सकती है. ये कहानी भी आकशवाणी से प्रसारित … Continue reading

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चुभन, टूटते सपनो के किरचों की ( कहानी –समापन किस्त )

आर्यन के टेस्ट चल रहें हैं..सुबह से उसे पोएम रटवा कर परेशान. अब शरारत से या सचमुच पर हर  बार वो एक लाइन गलत बोल जाता. वो डाँटती तो , कभी मुहँ फुला लेता…और कभी अड़ के बैठ जाता…अब पोएम … Continue reading

Posted in कहानी, बच्चे, सपने, स्कूल | 52s टिप्पणियाँ

चुभन, टूटते सपनो के किरचों की

अपना तकिया,अपना बिस्तर अपनी  दीवारें…और अपना खाली-खाली  सा कमरा…जिसने पूरे चौबीस साल तक उसकी हंसी-ख़ुशी-गम -आँसू सब देखे थे. उसके ग़मज़दा होने पर  कभी पुचकार कर अंक में भर लेता , कभी शिकायत करता ,इतना बेतरतीब क्यूँ रखा है तो … Continue reading

Posted in कहानी, दो बहनें, महानगर | 34s टिप्पणियाँ

आँखों का अनकहा सच

(ये  वो कहानी नहीं, जिसका जिक्र मैने अपनी पिछली पोस्ट  में  किया था….वो तो किस्तों वाली होगी…कुछ दिन चलेगी….यह भी थोड़ी लम्बी तो है..पर एक पोस्ट में ही समेट दिया है ) .दोनों बच्चे शोर कर रहें हैं…आपस में कुछ … Continue reading

Posted in एयरपोर्ट, कहानी, कॉलेज, स्कूल | 50s टिप्पणियाँ

जब पाठकों ने लिखवा ली कहानी

ये कहना जरा भी अतिशयोक्ति नहीं होगी  कि यह  लम्बी कहानी सचमुच पाठकों ने ही लिखवा ली. जैसा कि पहले भी मैने जिक्र किया ,छः पेज की कहानी को ४ पेज में कर के , सिर्फ ९ मिनट में समेटी … Continue reading

Posted in कहानी, गाँव, पाठक | 33s टिप्पणियाँ

उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (समापन किस्त )

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना  पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों  और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे. बड़ी दो बेटियों की शादी हो गयी … Continue reading

Posted in कहानी, गाँव, शहर | 31s टिप्पणियाँ

उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -13)

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना  पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों  और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे. बड़ी दो बेटियों की शादी हो गयी … Continue reading

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उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -12)

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना  पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों  और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में शिक्षक थे. बड़ी दो बेटियों की शादी हो गयी … Continue reading

Posted in कहानी, गाँव, प्रेम-विवाह | 25s टिप्पणियाँ