Category Archives: काली कॉफी

काली कॉफी में उतरती साँझ

थके कदमो से… घर के अंदर  घुसते ही बत्ती  जलाने का भी मन नहीं हुआ  खिड़की के बाहर उदास शाम, फ़ैल कर पसर गयी है मुस्कुराने का नाटक करने की ज़रूरत नहीं आज जी भर कर जी लूं, अपनी उदासी … Continue reading

Posted in अँधेरा कमरा, काली कॉफी, धूसर सी सांझ | 52s टिप्पणियाँ