Category Archives: खरगोश

वे ठिठके पल…

देर तक  मुट्ठी  में बंद, उस  चिपचिपी चॉकलेट का स्वाद गेट से लौटती  नज़र घड़ी की टिकटिक और  कदमों तले चरमराते  सूखे पत्तों की आवाज़ वो बेख्याली में आ जाना परेशान करती, सूरज की किरणों के बीच और मेरे चेहरे … Continue reading

Posted in खरगोश, घड़ी, चॉकलेट, लाइब्रेरी, सूरज | 58s टिप्पणियाँ