Category Archives: धर्मयुग

जब आसमान कुछ ज्यादा करीब लगता था !!

पिछली पोस्ट में की गयी पत्रिकाओं में छपे आलेखों और पत्रों के जिक्र ने जैसे मुझे यादों की वादियों में धकेल दिया और अभी तक मैं उनमे ही भटक रही हूँ. कई लोगों ने उन  आलेखों और पत्रों के बारे … Continue reading

Posted in 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान'शिवानी, क्रिकेट सम्राट', धर्मयुग, मालती जोशी | 52s टिप्पणियाँ

राखी का ऋण

काफी साल पहले,  धर्मयुग में एक कविता पढ़ी थी….और डायरी में नोट कर ली थी (अब अफ़सोस  हो रहा है,कवि का नाम क्यूँ नहीं नोट किया..)…और उसी हफ्ते अखबार में इसी कविता के भाव से सम्बंधित एक खबर पढ़ी कि … Continue reading

Posted in कविता, धर्मयुग, राखी | 40s टिप्पणियाँ

एक मुख़्तसर सी मुलाकात….’कैलाश सेंगर’ के साथ

पिछले कुछ दिन काफी व्यस्तता भरे थे , एक तो बच्चों की छुट्टियाँ,उनकी फरमाईशें और उनमें आकाशवाणी से एक कहानी की फरमाईश भी शामिल .कई मित्र नाराज़ भी होंगे…उनलोगों के इतने शौक और मेहनत से लिखे पोस्ट्स भी नहीं देख … Continue reading

Posted in आकाशवाणी, धर्मयुग | 29s टिप्पणियाँ

जब आसमान कुछ ज्यादा करीब लगता था !!

पिछली पोस्ट में की पत्रिकाओं,आलेखों और पत्रों के जिक्र ने जैसे मुझे यादों की वादियों में धकेल दिया और अभी तक मैं उनमे ही भटक रही हूँ.कई लोगों ने मेरे छपे आलेखों के बारे में भी पूछा,सोचा आपलोगों को भी … Continue reading

Posted in कॉलेज, धर्मयुग, पत्र, पत्रिकाएं, साप्ताहिक हिन्दुस्तान | 38s टिप्पणियाँ