Category Archives: समाज-सेवा

रंजित विचारे : सिर्फ करूणा भरा दिल ही नहीं एक चौकस दृष्टि भी

एक सभ्य,शिक्षित,जागरूक नागरिक के मन में हमेशा यह भावना हिलोरे मारती रहती  है कि इस समाज ने, जो इतना कुछ उसे दिया है…कुछ उसका प्रतिदान कर जाए…लोगो की भलाई के लिए कुछ तो समाज-सेवा कर जाए. परन्तु अपने दैनंदिन कार्यो … Continue reading

Posted in गोंद जनजाति, निर्मल -सदन, मदर टेरेसा, रंजित विचारे, समाज-सेवा | 33s टिप्पणियाँ