Category Archives: साधना

संस्मरण रुपी रेल का इंजन (भाग-२)

हॉस्टल से छुट्टियों में घर जाती तो टी.वी.पर भी फिल्म देखने का मौका मिलता पर मैं कभी आराम से बैठकर फिल्म नहीं देख पाती. वज़ह? सबके बैठने की  व्यवस्था करती,मुझे ही जगह नहीं मिलती. बीच की टेबल हटाकर दरी बिछाई … Continue reading

Posted in धर्मेन्द्र, नूतन, साधना, हिंदी फिल्म | 39s टिप्पणियाँ