Category Archives: college

आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू, शची (लघु उपन्यास) — 11

(अभिषेक ,एक कस्बे में शची जैसी आवाज़ सुन पुरानी यादों में खो जाता है.शची नयी नयी कॉलेज में आई थी.शुर में शचे ने उपेक्षा की  पर फिर वे करीब आ गए. पर उनका प्यार अभी परवान चढ़ा भी नहीं था … Continue reading

Posted in college, kolkata | 21s टिप्पणियाँ

आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू, शची (लघु उपन्यास)– 7

(अभिषेक, एक पत्रिका में कोई रिपोर्ट लिखने के उद्देश्य से एक कस्बे में आता है.वहाँ उसे शची जैसी ही . आवाज़ सुनायी देती है और  वह पुरानी यादों में खो जाता है कि शची नयी नयी कॉलेज में आई थी. … Continue reading

Posted in canteen, college, magzine | 21s टिप्पणियाँ

आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू, शची (लघु उपन्यास)– 6

(अभिषेक, एक पत्रिका में कोई रिपोर्ट लिखने के उद्देश्य से एक कस्बे में आता है.वहाँ उसे शची जैसी ही . आवाज़ सुनायी देती है और  वह पुरानी यादों में खो जाता है कि शची नयी नयी कॉलेज में आई थी. … Continue reading

Posted in canteen, college, common room | 25s टिप्पणियाँ

आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू, शची (लघु उपन्यास) –5

(अभिषेक, एक पत्रिका में कोई रिपोर्ट लिखने के उद्देश्य से एक कस्बे में आता है.वहाँ एक दुकान पर उसे एक नारी कंठ सुनायी देता है.वह चेहरा नहीं देख पाता.उसे शची की आवाज़ लगती है और वह परेशान हो उठता है.अपने … Continue reading

Posted in college, garden | 31s टिप्पणियाँ

दर्शक से श्रोता में तब्दील होने की दास्तान

‘स्पोर्ट्स डे’ की तरह ही स्कूल के ‘वार्षिक प्रोग्राम’ की तैयारी भी बड़े लगन और मेहनत से की जाती है.पर इसमें सारा दारोमदार टीचर पर होता है.प्रोग्राम के चयन से लेकर सैकड़ों बच्चों में से कुछ को चुनना फिर रिहर्सल … Continue reading

Posted in annual day, college, drama, school | 25s टिप्पणियाँ

और वो चला गया,बिना मुड़े….(लघु उपन्यास )–6

अपने कमरे में पढ़ाई में मन लगाने की कोशिश कर रही थी.इतना डर लग रहा था,बिलकुल भी नहीं पढ़ पा रही थी और ऐसे में में जब बुआ बड़े शौक से गहनों की डिजाइन पसंद कराने उसके कमरे में आईं … Continue reading

Posted in college, exam, friend | 24s टिप्पणियाँ

और वो चला गया,बिना मुड़े….(लघु उपन्यास )–5

‘नेहा ऽ ऽ ऽ …‘ किसी ने इतनी मिठास भरी आवाज में पुकारा कि किताबें फेंक, उद्भ्रांत सी चारों तरफ देखने लगी। ‘नेहा ऽऽऽ-‘ फिर आवाज आई; मुड़ कर देखा, ओह! कोई नजर तो नहीं आ रहा। परेशान सी इधर-उधर … Continue reading

Posted in college, exam, temple | 19s टिप्पणियाँ

और वो चला गया,बिना मुड़े….(लघु उपन्यास )–4

(नेहा स्कूल की प्रिंसिपल है.अपने केबिन में अचानक शरद को आते देख चौंक जाती है.और उसे शरद से अपनी पहली मुलाकात याद आने लगती हैं.यह भी कि किशोरावस्था में वह कितनी शैतान थी.सबको कैसे तंग करती रहती थी.शरद ने जब … Continue reading

Posted in college, twilight birthday, water fall | 20s टिप्पणियाँ