Author Archives: rashmiravija

About rashmiravija

मुझे लिखना पसंद है..कहानियाँ..कविताएँ..समसामयिक विषयों पर आलेख लिखती हूँ...अखबारों ..पत्रिकाओं में रचनाएं,प्रकाशित भी होती है. मुंबई आकाशवाणी से निय्तामित रूप से कहानियाँ और वार्ताएं प्रसारित होते हैं.

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Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

हमारी कॉलोनी के काका

उम्र के इस मोड़ पर भी….किसी को नमस्ते कहती हूँ…और वे आशिर्वादस्वरूप मेरी हथेली पर कभी कोई टॉफी..लेमनचूस…खट्टी-मीठी गोलियाँ तो कभी दो बेर रख देते हैं. मेरे ये कहने पर…”क्या काका….हम बच्चे थोड़े ही हैं…” वे मुस्कुरा कर कहते हैं….”अरे खा … पढना जारी रखे

काका, मराठी साहित्य'श्रीनिवास रा. तलवलकर', संस्मरण, kaka में प्रकाशित किया गया | 36 टिप्पणियाँ

ज़री बौर्डर पर काले धब्बे

जब सिवकासी में पटाखे बनाने वाले बाल-मजदूरों पर एक पोस्ट लिखी थी….उसके बाद ही ‘ज़री उद्योग’ में लगे  बच्चों के विषय में भी लिखने की इच्छा थी…खासकर इसलिए भी कि कई लोगों का बाल-श्रम के सन्दर्भ में कहना है कि … पढना जारी रखे

ज़री यूनिट, बाल श्रम, बाल-मजदूरों, सिवकासी में प्रकाशित किया गया | 50 टिप्पणियाँ

परकटे नन्हे परिंदे

रचना जी ने अपनी पोस्ट में ‘बाल मजदूरी’ के मुद्दे पर चर्चा की है…पहले भी मैने इस विषय पर लिखा है…और आज भी  मन में कुछ सवाल सर उठा रहे हैं…आखिर, बच्चे अपने खेलने-कूदने ..पढ़ने-लिखने के दिनों में ये सोलह … पढना जारी रखे

'बाल मजदूरी', 'मिड डे मील' में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

फिल्म ‘मोड़’ : जैसे फिज़ा में एक प्यारी सी धुन

जैसा कि इस ब्लॉग का नाम है….यहाँ बस बातें ही होती हैं…और जब मैं फिल्मो की बातें करती हूँ तो फिर बातों-बातों में लोगो को फिल्म की  कहानी भी पता चल जाती है…और कुछ लोग ऐसा नायाब मौका हाथ से … पढना जारी रखे

आएशा टाकिया, नागेश कुकनूर, फिल्म 'मोड़' : रणविजय सिंह में प्रकाशित किया गया | 32 टिप्पणियाँ

DDLJ : अच्छा है कि ‘राज’ हमारी यादों में जिंदा एक फिल्म किरदार है

आशा है,आप सबकी दीपावली…खुशियों से भरी गुजरी होगी…और दीपों के आलोक ने घर के साथ-साथ आपके जीवन को भी रौशन कर दिया होगा. मुझे भी आज थोड़ी फुरसत मिली और टी.वी. ऑन किया तो देखा “दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ … पढना जारी रखे

"दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे', फिल्म, DDLJ में प्रकाशित किया गया | 28 टिप्पणियाँ

सुबह की सैर के बहाने

कुछ दिनों पहले प्रवीण पाण्डेय जी ने और अजित गुप्ता जी ने अपने प्रातः भ्रमण पर एक पोस्ट लिखी थी…इसके काफी पहले से ही मैं भी मय-तस्वीरों के एक पोस्ट लिखनेवाली थी….पर बस, टलता ही रहा..कुछ महीनो से पता नहीं कैसी व्यस्तता … पढना जारी रखे

प्रातः भ्रमण, मेजर अंकल, हॉस्टल में प्रकाशित किया गया | 64 टिप्पणियाँ