Category Archives: संस्मरण

हमारी कॉलोनी के काका

उम्र के इस मोड़ पर भी….किसी को नमस्ते कहती हूँ…और वे आशिर्वादस्वरूप मेरी हथेली पर कभी कोई टॉफी..लेमनचूस…खट्टी-मीठी गोलियाँ तो कभी दो बेर रख देते हैं. मेरे ये कहने पर…”क्या काका….हम बच्चे थोड़े ही हैं…” वे मुस्कुरा कर कहते हैं….”अरे खा … पढना जारी रखे

काका, मराठी साहित्य'श्रीनिवास रा. तलवलकर', संस्मरण, kaka में प्रकाशित किया गया | 36 टिप्पणियाँ

हैप्पी बर्थडे सीमा..:)

पता नहीं कितने लोगो को कहते सुना ..मेरा बरसो पुराना फ्रेंड फेसबुक या नेट के माध्यम से मिला/मिली …और मैं खीझ कर रह जाती…मुझे तो मेरी कोई फ्रेंड मिलती ही नही…अधिकाँश फ्रेंड्स की तो शादी के बाद सरनेम चेंज हो … पढना जारी रखे

ऑर्कुट, फेसबुक, संस्मरण, सीमा प्रधान में प्रकाशित किया गया | 44 टिप्पणियाँ

हाय!! मेरी आधा किलो भिन्डी :(

जैसा कि मैने पिछली पोस्ट में जिक्र किया था….एक शाम एक फोन आया कि “हम एक न्यूज़ चैनल से बोल  रहे हैं…गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमत पर आपकी प्रतिक्रिया चाहिए…कल आपके घर आ  जाएँ, आपके विचार जानने ?”….ऐसे अचानक … पढना जारी रखे

गैस सिलेंडर, टी.वी. चैनल, भिन्डी, संस्मरण में प्रकाशित किया गया | 58 टिप्पणियाँ

बिजली की तरह कौंध कर विलुप्त हो जाते, वे पल….

आजकल गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोत्तरी चर्चा का विषय बनी हुई है.  कुछ साल पहले भी सिलेंडर के दाम बढे थे और सबके साथ मैं भी परेशान हो गयी थी…बस ये बात दीगर है कि मेरी परेशानी का सबब … पढना जारी रखे

मसूरी, संस्मरण, सोनू निगम, हरिद्वार, Zee t.v. में प्रकाशित किया गया | 42 टिप्पणियाँ

संस्मरण रुपी रेल का इंजन

संस्मरणों की रेल में डब्बे तो जुड़ते जा रहे हैं…पर इंजन अब तक दूसरे ब्लॉग पर ही मौजूद है. हाँ ! उस पोस्ट को इंजन कह सकते हैं, जिसने मेरे लेखन को ब्लॉग जगत की तरफ मोड़ा. हिंदी ब्लॉग जगत … पढना जारी रखे

फिल्मे, संस्मरण में प्रकाशित किया गया | 39 टिप्पणियाँ

रश्मि से रविजा तक

संस्मरण की श्रृंखला लिखने की कोई योजना नहीं थी…पर टिप्पणियों में कई  लोगो ने लिखा, संस्मरण- श्रृंखला अच्छी चल रही है…आपके संस्मरण के रेल में सवार हैं….तो हमने सोचा अब रेल में कुछ डब्बे और जोड़ ही दें. यूँ भी … पढना जारी रखे

पत्र मित्रता, रश्मि रविजा, संस्मरण में प्रकाशित किया गया | 53 टिप्पणियाँ

खाली नहीं रहा कभी, यादों का ये मकान

(सोचा था….इस ब्लॉग से एक ब्रेक लेकर…दूसरे ब्लॉग पर कहानी लिखना शुरू करुँगी…अब मेहमानों के आवागमन ने ब्रेक तो दिला दिया…पर नया कुछ लिखने का वक्त नहीं मिल रहा (ना ही पढ़ने का…साथी ब्लॉगर्स माफ़ करेंगे/करेंगी ,…काफी कुछ जमा हो … पढना जारी रखे

पटना, संस्मरण, हॉस्टल में प्रकाशित किया गया | 44 टिप्पणियाँ